इस ब्लॉग के माध्यम से VPN क्या होता है। VPN के फायदे तथा VPN के नुकसान। और VPN कितने प्रकार का होता है। इन सब के बारे में जानने की कोशिश करते है। आशा करते है कि यह ब्लॉग आपको काफी पसन्द आयेगा।

VPN क्या होता है।

VPN का पूरा नाम Virtual Private Network होता है। यह एक प्राइवेट नेटवर्क होता है। यह नेटवर्क में एक सुरक्षित और Encrypted कनेक्शन बनाता है। यह डाटा लीक होने से बचाता है। और उपयोगकर्ता को ऑनलाइन Anonymity भी प्रदान करता है। इसका उपयोग करके उपयोगकर्ता अपनी Location को बदल सकता है। अगर किसी देश में कोई वेबसाइट ब्लॉक है तो उस वेबसाइट को VPN के माध्यम से Access किया जा सकता है। यह Free और Paid दोनो मिलता है।

उपयोगकर्ता को हमेशा Paid और Trusted VPN का इस्तेमाल करना चाहिये। क्योंकि इससे उपयोगकर्ता के Privacy और डाटा की Security के साथ Compromise नही होता है।

VPN के फायदे।

VPN के निम्नलिखित फायदे है। जो इस प्रकार है।
1- VPN में Encryption का इस्तेमाल होता है। जिससे डाटा Transfer हॊते समय हैकरो से सुरक्षित रहता है।
2- यह Public WiFi कनेक्शन को सुरक्षित करता है।
3- यह ISP (Internet Service Provider) के Tracking को रोकता है।
4- VPN की सहायता से Restricted वेबसाइट को Access किया जा सकता है।

VPN के नुकसान।

VPN के निम्नलिखित नुकसान होते है। जो इस प्रकार है।
1- VPN का उपयोग करके इन्टरनेट चलाने पर Speed थोड़ा कम मिल सकता है।
2- VPN का उपयोग करने पर VPN प्रदाता उपयोगकर्ता के डाटा का गलत इस्तेमाल भी कर सकते है।
3- VPN का इस्तेमाल करके पूरी तरह से गुमनाम नही रहा जा सकता है।
4- VPN का इस्तेमाल करना कुछ देश में गैरकानूनी होता है।

VPN के प्रकार।

VPN मुख्य रूप से 2 प्रकार के होते है।
1- Remote Access VPN
2- Site-To-Site VPN

1. Remote Access VPN

Remote Access VPN एक ऐसा VPN होता है जिसको किसी Organization के कर्मचारी या Worker किसी भी जगह से कभी भी Organization के Services और Resources को Remotaly इस्तेमाल कर सकते है। इसको VPDN (Virtual Private Dial-Up Network) VPN भी कहा जाता है।


2. Site-To-Site VPN

Site-To-Site VPN एक ऐसा VPN होता है जिसमें किसी Organization के अलग अलग जगहो पर अलग अलग ऑफिस को इन्टरनेट के माध्यम से Connection स्थापित किया जाता है। इसमें एक ऑफिस के Services और Resources को दूसरे ऑफिस में इस्तेमाल किया जाता है। इसको Router To Router VPN भी कहा जाता है। यह VPN दो प्रकार का होता है।

1. Intranet-Based VPN-

जब एक ही Organization के अलग अलग ऑफिस आपस में Connection स्थापित करने के लिये Site-To-Site VPN का इस्तेमाल करते है। और Services और Resources का लेन देन करते है। तो यह Interanet-Based VPN कहलाता है।

2. Extranet-Based VPN-

जब एक Organization के ऑफिस किसी अलग Organization के ऑफिस से Connection स्थापित करने के लिये Site-To-Site VPN का इस्तेमाल करते है। और Services और Resources का लेन देन करते है। तो यह Interanet-Based VPN कहलाता है।

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