Protocol क्या है।
प्रोटोकॉल एक 'Set Of Rules' होता है। जब एक नेटवर्किंग डिवाइस दूसरे नेटवर्किंग डिवाइस के साथ Communicate करता है, तो उसके लिए एक Rules या Method होता है। उसी Rules या Method को प्रोटोकॉल कहा जाता है। प्रोटोकॉल को Access Method भी कहा जाता है। इसके बिना हम इन्टरनेट के माध्यम से एक-दूसरे संवाद नही कर सकते है। प्रोटोकॉल के माध्यम से ही एक नेटवर्किंग डिवाइस दूसरे नेटवर्किंग डिवाइस के साथ कनेक्ट हो पाता है।दूसरे शब्दों में -
प्रोटोकॉल एक Standard होता है। जिसकी सहायता से एक कम्प्यूटर दूसरे कम्प्यूटर के साथ कम्युनिकेशन स्थापित कर पाता है। जिससे डेटा का आदान-प्रदान हो सके। डेटा को कैसे Send और Recive कराना है। या डेटा सही तरीके से Transfer हुआ है कि नहीं, ये सभी कार्य प्रोटोकॉल की सहायता से होता है। प्रोटोकॉल के बिना कोई भी कम्प्यूटर नेटवर्क ठीक से काम नहीं कर सकता है।उदाहरण के लिये -
यातायात का नियम - जब हम लोग गाड़ी सड़क पर चलाते है, तो उसके लिये कई Rules होते है। जैसे की आप को गाड़ी हमेशा सड़क की बाॅयी ओर चलाना है। या अगर आप सड़क पार कर रहे है तो Indicator जला लेना है। और अगर कोई चौराहा मिले तो रास्ता साफ होने पर अपने Side से निकल जाना है। ठीक वैसे ही कम्प्यूटर नेटवर्क में डेटा को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से Transfer करने के लिये 'Set Of Rules' बनाये गये है। जिन्हे हम प्रोटोकॉल कहते है।Protocol के लेवल।
प्रोटोकॉल तीन लेवल के होते है।1- हार्डवेयर लेवल प्रोटोकॉल
2- साफ्टवेयर लेवल प्रोटोकॉल
3- एप्लीकेशन लेवल प्रोटोकॉल
Protocol के प्रकार।
कम्प्यूटर नेटवर्किंग में सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और एप्लीकेशन लेवल के आधार पर बहुत से प्रोटोकॉल होते है। लेकिन उनमें से कुछ महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल इस प्रकार है -1. HTTP
HTTP का पूरा नाम 'Hyper Text Transfer Protocol' होता है। यह एक नेटवर्क प्रोटोकॉल है, जो TCP/IP प्रोटोकॉल का उपयोग करता है। इस प्रोटोकॉल का आविष्कार किया 'Tim Berners-Lee' ने 1989 में किया था। जब आप अपने कम्प्यूटर या मोबाइल में ब्राउजर खोलते है, और किसी वेबसाइट पर जाते है, तब आप http:// जरूर देखते हैं। यह प्रोटोकॉल क्लाइंट के ब्राउजर द्वारा भेजे गये Request के आधार पर सर्वर से डेटा (ईमेज, ऑडियो, वीडियो और डॉक्यूमेंट) को वेबपेज के माध्यम से क्लाइंट के ब्राउजर पर दिखाता है। HTTP डिफाल्ट रूप से पोर्ट नम्बर 80 पर काम करता है।2. HTTPS
HTTPS का पूरा नाम 'Hyper Text Transfer Protocol Secure' होता है। यहां पर Secure का मतलब Security है, HTTPS ही HTTP का Secure वर्जन है। क्योंकि इसमें SSL (Secure Sacket Layer) का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें क्लाइंट के ब्राउजर और सर्वर के बीच डेटा का ट्रान्सफर Encrypted फॉर्म में होता है। ये HTTP की तुलना में थोड़ा Slow काम करता है। क्योंकि इसमें डेटा को सबसे पहले Encrypt किया जाता है, फिर ट्रान्सफर किया जाता हैं। ये डिफॉल्ट रूप से पोर्ट नम्बर 443 पर काम करता है।3. TCP
TCP का पूरा नाम 'Transmission Control Protocol' होता है। TCP एक Connection Oriented प्रोटोकॉल होता है। इसका मतलब है कि, ये प्रोटोकॉल डेटा ट्रान्सफर करने से पहले कनेक्शन को चेक करता है, कि कनेक्शन Establish हुआ है कि नहीं फिर डेटा ट्रान्सफर करता है। ये प्रोटोकॉल Reliable होता है, और डेटा डिलीवरी की गारन्टी देता है। TCP एक Heavy Weight और Slow प्रोटोकॉल होता है। इस प्रोटोकॉल में डेटा ट्रांसफर करने में टाइम लगता है, लेकिन डेटा का Loss नही होता है।4. UDP
UDP का पूरा नाम 'User Datagram Protocol' होता है। UDP एक Connection Less प्रोटोकॉल होता है। ये प्रोटोकॉल डेटा ट्रान्सफर करने से पहले कनेक्शन को चेक नहीं करता है। ये प्रोटोकॉल Unreliable होता है, और डेटा डिलीवरी की गारन्टी भी नहीं देता है। UDP एक Light Weight और Fast प्रोटोकॉल होता है। इस प्रोटोकॉल में डेटा ट्रांसफर करने में टाइम नहीं लगता है, लेकिन डेटा का Loss जरूर होता है। जैसे कि- Video Calling और Route Tracing इत्यादि ।5. FTP
FTP का पूरा नाम 'File Transfer Protocol' होता है। FTP बहुत ही पुराना प्रोटोकॉल है। इस प्रोटोकॉल की सहायता से हम किसी फाइल को इन्टरनेट के माध्यम से एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर पर ट्रान्सफर करते है। FTP पूरी तरह क्लाइंट-सर्वर Archetecture पर कार्य करता है। इस प्रोटोकॉल में SSL/TLS वाला डेटा Encryption इस्तेमाल होता है। जब हम लोग फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसी वेबसाइट पर File (Photo, Video) अपलोड करते है, तो उस समय हम लोग FTP का उपयोग कर रहे होते हैं।6. SMTP
SMTP का पूरा नाम 'Simple Mail Transfer Protocol' होता है। ये प्रोटोकॉल एप्लीकेशन Layer पर कार्य करता है। SMTP के माध्यम से हम इंटरनेट पर एक कम्प्यूटर/मोबाइल से दूसरे कम्प्यूटर/मोबाइल पर Email भेज सकते है या प्राप्त कर सकते है। आजकल बहुत से ऐसे वेब एप्लीकेशन है जिनसे हम Email भेज सकते है। जैसे कि -1- Gmail
2- Hotmail
3- Yahoo Messenger
7. POP
POP का पूरा नाम 'Post Office Protocol' होता है। यह एक Client-Server प्रोटोकॉल है। POP के सहायता से ही इंटरनेट से प्राप्त Email उपयोगकर्ता के मेल एप्लीकेशन में डाउनलोड हो पाता है। जिससे उपयोगकर्ता उस Email को ऑफलाइन भी पढ़ सकता है। POP के दो संस्करण है।1- POP2 (पोर्ट नंबर 110 पर कार्य करता है)
2- POP3 (पोर्ट नंबर 995 पर कार्य करता है)
आजकल POP3 ही इस्तेमाल होता है।
इसे भी पढ़ें ।
1. OSI मॉडल क्या है। OSI मॉडल में कितने लेयर होते हैं।
8. ARP
ARP का पूरा नाम 'Address Resolution Protocol' होता है। यह Data Link Layer का प्रोटोकॉल है। यह एक ऐसा प्रोटोकॉल है, जिसकी सहायता से किसी IP Address से उस डिवाइस का MAC Address का पता लगाया जाता है। इस प्रोटोकॉल का उपयोग लोकल नेटवर्क में रखे दो अलग-अलग डिवाइस को आपस में Communicate कराने के लिये किया जाता है।9. Talnet
Telnet का पूरा नाम 'Telecommunication Network' यह एक नेटवर्क प्रोटोकॉल होता है। जो TCP/IP प्रोटोकॉल की सहायता से दूर किसी दूसरे कम्प्यूटर को अपने कम्प्यूटर पर Remotely एक्सेस कर सकते है। Telnet कमांड लाइन इंटरफेस का उपयोग करता है। यह प्रोटोकॉल पोर्ट नंबर 23 का उपयोग करता है।कुछ अन्य Protocol
1- DHCP (Dynamic Host Configration Protocol)2- PPTP (Point To Point Tunneling Protocol)
4- SIP (Session Initiation Protocol)
5- RTP (Real-Time Transport Protocol)
6- RDP (Remote Desktop Protocol)
7- SFTP (Secure File Transfer Protocol)
8- RAP (Route Access Protocol)
9- Gopher
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